अपने आसपास बोतल देख रहे हो? तुमने इसे खरीदा, पानी पिया और 5 मिनट में फेंक दिया। लेकिन ध्यान से सुनो। यह बोतल तुम्हारे फेंकने के बाद भी इसी धरती पर रहेगी। अगले 450 साल तुम नहीं रहोगे। तुम्हारे बच्चे नहीं रहेंगे। उनके बच्चे भी नहीं रहेंगे। लेकिन यह बोतल यह रहेगी। समुद्र प्लास्टिक से भर रहे हैं। जानवर मर रहे हैं। और अब तो माइक्रोप्लास्टिक तुम्हारे खाने में भी पहुंच चुका है। हां, जो खाना तुम अभी खा रहे हो उसमें प्लास्टिक के कण घुले हैं। डर लगा ना? लेकिन भाई, मैं तुम्हें डराने नहीं आया। मैं तुम्हें एक ऐसा मौका दिखाने आया हूं जो शायद जिंदगी में एक बार आता है। और सबसे जरूरी बात इस ब्लॉग में दो रास्ते हैं। एक उनके लिए जिनके पास 50 से 60 लाख हैं और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाना चाहते हैं।
और दूसरा उनके लिए जिनकी जेब में एक भी रुपया नहीं है। दोनों इस बिजनेस से पैसा बना सकते हैं। अब कैसे वह मैं आगे बताऊंगा पूरा देखना क्योंकि इस तबाही को रोकना ही आज का सबसे बड़ा बिजनेस अपॉर्चुनिटी है और इसमें मदद करती है आपको सरकार भी। यह है द पेपर बॉटल रेवोलशन। सोचो आज से सिर्फ 5 साल पहले किसी ने नहीं सोचा था कि इंडिया में सिंगल यूज़ प्लास्टिक बैन होगी। लोग कहते थे यह सरकारी बात है। कुछ नहीं होता लेकिन आज हो रहा है। जब तुम किसी प्रीमियम कैफे में जाते हो वो प्लास्टिक स्ट्रॉ नहीं देते। पेपर स्ट्रॉ देते हैं। क्यों? क्योंकि कस्टमर जाग चुका है। क्योंकि ब्रांड्स को अब इको फ्रेंडली दिखना है। क्योंकि जो ब्रांड सस्टेनेबल हैं, वह अगले 10 साल में मार्केट से बाहर होगा। और अब यही बदलाव बोतलों में भी आ रहा है। बड़े-बड़े ब्रांड्स परेशान है। उन्हें सस्टेनेबल पैकेजिंग चाहिए। कस्टमर इको फ्रेंडली लेबल मांग रहा है और यहीं पर तुम्हारी एंट्री होती है। पेपर बॉटल का मार्केट अभी भारत में बिल्कुल खाली पड़ा है। मान लो तुम आज शुरू करते हो तो कल तुम इस मार्केट के लीडर होगे। अब मन में एक सवाल आ रहा होगा कि भाई कागज में पानी कैसे टिकेगा? गल नहीं जाएगी बोतल। यही तो इस बिजनेस का असली खिलाड़ी है। असली जादू है। सुनो ध्यान से। शुरुआत होती है वेस्ट पेपर या गन्ने की खोई से। हां, वही खोई जो जूस निकालने के बाद बेकार समझकर फेंक दी जाती है। उससे पल्प बनाया जाता है।
फिर मशीनंस में उस पल्प को बोतल की शेप दी जाती है। लेकिन असली गेम चेंजर है बायोटिंग। बोतल के अंदर एक स्पेशल लेयर लगाई जाती है। यह लेयर प्लांट बेस्ड होती है। यह पानी को कागज छूने नहीं देती। बोतल पूरी तरह सेफ रहती है और जब तुम इसे फेंकते हो यह मिट्टी में मिलकर खाद बन जाती है। 450 साल नहीं कुछ महीनों में जानवर सेफ, समुद्र सेफ और हम सब धरती पर सेफ। यही है इंजीनियरिंग का असली जादू। पैसे की बात करें दो रास्ते। पहला रास्ता है मैन्युफैक्चरिंग सेटअप। उनके लिए जिनके पास कैपिटल है, पूंजी है, बजट है, सेटअप के लिए चाहिए 5000 से 8000 स्क्वायर फीट की जगह पल्पिंग और मोल्डिंग यूनिट्स जैसे एडवांस मशीन वर्किंग कैपिटल्स। टोटल इन्वेस्टमेंट करीब 50 से 60 लाख। सुनकर बड़ा लग रहा होगा लेकिन रुको। रिटर्न देखो। एक बोतल बनाने का खर्च 6 से ₹7 होलसेल सेलिंग प्राइस 10 से ₹12। अब विजुअलाइज करो। अब देखो रोज सिर्फ 4000 बोतल सप्लाई करो। महीने का टर्नओवर ₹1 लाख से ऊपर। सारे खर्चे निकालो। सैलरी, बिजली, रॉ मटेरियल फिर भी 3 से 4 लाख नेट प्रॉफिट हर महीने। डेढ़ से 2 साल में पूरा इन्वेस्टमेंट वापस। उसके बाद जो भी प्रॉफिट आए वो सब सिस्टम इनकम।
रास्ता नंबर दो जीरो इन्वेस्टमेंट रिसेलर मॉडल। उनके लिए जिनकी जेब खाली है लेकिन हिम्मत है। मतलब बिजनेस करना है उनको। अब जो लोग सोच रहे हैं भाई 50 से 60 लाख कहां से लाऊं? मेरे पास तो कुछ नहीं है। तो सुनो तुम्हारे लिए भी रास्ता है। और यह रास्ता ऑनेस्टली ज्यादा स्मार्ट है। मान लो तुम एक मैन्युफैक्चरर के पास जाते हो जो ऑलरेडी पेपर बतल्स बना रहा है। उससे बोलते हो भाई मैं तेरी बोतल्स बेचूंगा। ऑर्डर्स मैं लाऊंगा। बस तुम्हारा काम क्या है?
पहला अपने शहर में उन बिजनेस को ढूंढो जिन्हें इको फ्रेंडली पैकेजिंग चाहिए। जो शॉप्स, कैफे, होटल, स्कूल, कैंटीन, रेस्टोरेंट, इवेंट, ऑर्गेनाइजर्स इन सब से बात करो। दूसरा स्टेप अब उनसे बात करो। रेट बताओ और एडवांस ले लो। हां, आपको एडवांस लेना है उनसे और आपको ₹1 भी अपनी जेब से नहीं लगाना है। तीसरा स्टेप आता है मैन्युफैक्चर को वो आर्डर प्लेस करो, डिलीवरी करो बाकी पेमेंट लो। बेस्ट का फर्क वही है जो तुम्हारा कमीशन बनेगा। देखो कि तुम एक जूस कंपनी को 10,000 बॉटल्स का आर्डर दिलाते हो। मैन्युफैक्चर को देते हो ₹8 प्रति बोतल। कंपनी से लेते हो ₹11 प्रति बोतल्स। ₹3 का फर्क और 10,000 बॉटल्स मतलब कि 300 एक ऑर्डर में और यह आर्डर तुम हर महीने रिपीट करा सकते हो। कोई फैक्ट्री नहीं, कोई मशीन नहीं, कोई बड़ा इन्वेस्टमेंट नहीं। बस एक स्मार्टफोन, थोड़ी हिम्मत और सही बात करने का तरीका। यही है असली जीरो टू इनकम का रास्ता। लेकिन हां, इसमें आपका मेहनत लगता है, आपका लगन लगता है। आपका जुनून लगता है। आप जितनी ज्यादा मेहनत करते हैं, आप उतना ज्यादा पैसा बनाएंगे। क्योंकि भागदौड़ करनी पड़ती है। बिना मेहनत का कुछ नहीं होने वाला मेरे दोस्तों। आपको मेहनत करनी पड़ेगी आगे बढ़ने के लिए।
अब दोस्तों अगर तुम मैन्युफैक्चरिंग सेटअप कर रहे हो तो यह तीन काम इग्नोर मत करना। पहला कंपनी रजिस्टर कर लो। दूसरा एफएसएसआई लाइसेंस लो। मामला खाने पीने से जुड़ा है। बिना लाइसेंस के एक दिन भी काम मत करो क्योंकि बाद में कोई दिक्कत आ सकती है। तीसरा और यह सबसे स्मार्ट मूव है। स्टार्टअप इंडिया में रजिस्टर करो। गवर्नमेंट टैक्स में भारी छूट देती है। इसलिए बता रहा हूं। बहुत लोग ये सेटअप मिस कर देते हैं और लाखों गवाते हैं। अब सेलर मॉडल वालों के लिए शुरू में सिर्फ जीएसटी नंबर काफी है। बाकी बाद में होता रहेगा। मार्केटिंग यह दोनों के लिए लेकिन तरीका अलग-अलग मैन्युफैक्चरिंग वालों के लिए घर-घर मत भटको। सीधे जाओ उन कंपनीज़ के पास जो अपने ब्रांड को ग्रीन और प्रीमियम दिखाना चाहती हैं। जूस कंपनीज़, ऑर्गेनिक मिल्क ब्रांड्स, प्रीमियम वाटर सप्लायर्स, लग्जरी होटल्स इन्हें सिर्फ बोतल मत बेचो। इन्हें बेचो एक विज़न। बोलो आपका ब्रांड इको फ्रेंडली दिखेगा। कस्टमर ट्रस्ट करेगा, सेल्स बढ़ेगी। यही पिच उन्हें कन्वर्ट करेगी। रिसेलर वालों के लिए तुम्हारा सबसे बड़ा हथियार है तुम्हारा लोकल नेटवर्क।
वो दुकानदार जिसे तुम रोज जानते हो। वो होटल ओनर जो तुम्हारे मोहल्ले में है। वो जूस वाला जो सुबह से शाम कमाता है। उनसे बस एक सवाल पूछो। भाई क्या तुम्हें पता है कि प्लास्टिक की वजह से तुम्हारे कस्टमर तुम्हें जज करते हैं या फिर आप कुछ भी ऐसा कुछ अच्छा सा बना सकते हो जो क्वेश्चन आप उनसे पूछ सकते हो जिससे यह तो है कि यहां पे प्रॉब्लम है और बहुत सारे लोग इसके जगह पर यह यूज करना चाहते हैं इको फ्रेंडली बॉटल्स तो आप बस लग जाओ। इसी हिसाब से आप कन्वर्शन करो और फिर आपको आर्डर आएगा और आप उन्हें दे दो। दोस्तों, बहुत से लोग बिजनेस करते हैं, लेकिन कुछ बिजनेस ऐसे होते हैं जो सिर्फ पैसा नहीं दुआएं भी देते हैं। पेपर बॉटल का बिजनेस उन्हीं में से एक है। चाहे तुम फैक्ट्री लगाओ, चाहे रिसेलर बनो। दोनों तरफ से तुम वो इंसान हो जो इस धरती को बचाने में हाथ बटा रहे हो। यह सिर्फ बिजनेस नहीं है। यह एक जिम्मेदारी है। अगर तुम मैन्युफैक्चरिंग वाला रास्ता चुनना चाहते हो तो कमेंट में लिख देना फैक्ट्री। अगर तुम जीरो इन्वेस्टमेंट वाला रिसेलर मॉडल चाहते हो तो लिख देना रिसेलर। दोनों की डिटेल गाइड डिस्क्रिप्शन में मिलेगी और telegram चैनल से जरूर जुड़ जाना।
वहां पर मैं आपको सब कुछ पीडीएफ में प्रोवाइड कर दूंगा। आप इली उसे पढ़कर आप समझ पाओगे कि कैसे क्या करना है। ठीक है? और कमेंट बॉक्स में आपको इन मशीनों का लिंक मिल जाएगा। तो आप एक क्लिक करके उन सप्लायर से बात कर सकते हो। जान सकते हो कि क्या-क्या रेट चल रही है इन मशीनों की। ठीक है? और दोस्तों इसे उस दोस्त को यह ब्लॉग जरूर भेजना जो कहता है यार पैसे नहीं है तो क्या करूं? अब उसके पास जवाब नहीं रहेगा। अगर आप ऐसा ब्लॉग देखना चाहते हैं तो आप यहां पर क्लिक करके देख सकते हैं। मैं मिलता हूं आपसे वहीं पर। बहुत-बहुत धन्यवाद। इस ब्लॉग में बताए गए कमाई के आंकड़े और लागत आपके लोकेशन और मेहनत के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। कृपया किसी भी बिजनेस में निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च जरूर करें। धन्यवाद।