BYD के टेक्नोलॉजी से बिजनेस आइडियाज

एक सेकंड के लिए रुकिए दोस्तों। सोचिए आप दिल्ली में हैं। आपने अपनी गाड़ी में एक बार पेट्रोल भरवाया, एक बार चार्ज किया और आप सीधा आरसीबी का मैच देखने बेंगलुरु पहुंच गए। बिना एक बार रुके, बिना किसी पेट्रोल पंप के, बिना किसी चार्जिंग स्टेशन के 2100 कि.मी. का सफर एक ही बार में। अभी आप सोच रहे होंगे यार यह तो इंपॉसिबल है। लेकिन दोस्तों यही इंपॉसिबल काम कर दिखाया है एक ऐसी कंपनी ने जिसे दुनिया सिर्फ एक ऑर्डिनरी चाइनीस ब्रांड समझती थी और आज वही कंपनी Tesla को टक्कर दे रही है। Toyota को टेंशन दे0 रही है और पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की नींद उड़ा चुकी है। और सबसे खतरनाक बात यह है दोस्तों यह रिवोल्यूशन सिर्फ गाड़ियां नहीं बदल रहा है। ये बिजनेस अपॉर्चुनिटीज क्रिएट कर रहा है इंडिया में अभी इस वक्त ऐसे बिजनेस जो अगर आपने सही टाइम पर पकड़ लिए तो आने वाले कुछ सालों में आप एक बड़े प्लेयर बन सकते हो। तो आज इस ब्लॉग में हम बात करेंगे बी वाईडी की उस टेक्नोलॉजी के बारे में जो इंजीनियरिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनने जा रही है और साथ में हम डिटेल में समझेंगे तीन ऐसे बिजनेस जो इस रेवोल्यूशन के साथ ग्रो कर सकते हैं। सिंपल लैंग्वेज में रियल नंबर के साथ बिल्कुल ग्राउंड लेवल से। लेकिन पहले अगर आप पहली बार हमारे ब्लॉग पर आए हैं तो मैं बता दूं यहां हम सिर्फ बिजनेस आईडिया नहीं लाते। हम वो आईडिया लाते हैं जो इंडिया में अभी एग्जिस्ट नहीं करते।

यह बहुत शुरुआती स्टेज में है। जहां कंपटीशन लगभग जीरो होता है। हम रिसर्च करते हैं, डाटा देखते हैं और फिर आपको बताते हैं। तो  दोस्तों, किसी भी बिजनेस में कूदने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि रेवोल्यूशन आया कहां से है। क्योंकि जब आप यह समझ जाओगे, तभी आप यह तय कर पाओगे कि आपको कहां खड़ा होना है। तो चलो बिल्कुल बेसिक से शुरू करते हैं। आप जानते हैं कि एक नॉर्मल पेट्रोल इंजन में क्या होता है?
आप ₹100 का पेट्रोल डालते हो तो उस 100 में से लगभग ₹70 हीट के रूप में उड़ जाता है या एमिशन बनकर बाहर निकल जाता है। सिर्फ ₹30 ही आपकी गाड़ी को चलाने में काम आता है। इंजीनियर्स इस समस्या को दशकों से सॉल्व करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन दुनिया का सबसे अच्छा इंजन भी 38 से 40% एफिशिएंसी से ज्यादा नहीं पहुंच पाया। यह एक लिमिट थी जिसे तोड़ना लगभग नामुमकिन माना जाता था। अब बीवाईडी ने क्या किया?

उनके फिफ्थ जनरेशन हाइब्रिड सिस्टम ने 46.06% थर्मल एफिशिएंसी हासिल कर ली। सुनने में छोटा नंबर लगता है लेकिन इंजीनियरिंग की दुनिया में यह बहुत बड़ा बदलाव है। इस एक नंबर ने Tesla, Toyota, Hyundai सब कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया और इसी टेक्नोलॉजी के दम पर BYD ने 2024-25 के बीच 43 लाख से ज्यादा गाड़ियां बेच दी। यह कंपनी है BYD बिलर ट्रिम्स। पहले यह सिर्फ बैटरी बनाती थी, लेकिन इन्होंने अपनी बैटरी टेक्नोलॉजी को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया। इनके ब्लेड बैटरी का टेस्ट किया गया। नेल पेंट्रेशन टेस्ट जहां दूसरी बैटरियां छेद होने पर आग पकड़ लेती है, वहीं बीवाईडी की बैटरी सुरक्षित रही। मतलब यह कंपनी सिर्फ रेंज नहीं दे रही, सेफ्टी भी दे रही है और यही कॉम्बिनेशन है जो इस रेवोल्यूशन को अनस्टोपेबल बना रहा है। Bydडी का फिफ्थ जनरेशन डीएमआई सिस्टम एक हाइब्रिड सिस्टम है। लेकिन यह ट्रेडिशनल हाइब्रिड से बिल्कुल अलग है। समझो ऐसे। आपके पास एक इलेक्ट्रिक गाड़ी है। वह इलेक्ट्रिक मोटर से चलती है। लेकिन साथ में एक छोटा सा पेट्रोल इंजन भी है जो एक सुपर एफिशिएंट जनरेटर की तरह काम करता है। जब बैटरी लो हो वह पेट्रोल इंजन स्टार्ट होता है और बैटरी चार्ज करता रहता है और जब फुल चार्ज हो और फुल टैंक हो तब मिलता है 2100 कि.मी. का रेंज। इसकी तीन वैरायटीज हैं जो मार्केट में आ रही है। पहला डीएमआई। यह सिटी ड्राइविंग के लिए है। रोजाना ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए एफिशिएंसी मैक्सिमम। दूसरा डीएमपी। यह परफॉर्मेंस के लिए है। जो लोग हाईवे पर ड्राइव करते हैं। स्पीड और पावर दोनों चाहिए।

और तीसरा है डीएमओ। यह ऑफ रोड एडवेंचर के लिए पहाड़, जंगल, कीचड़ सब हैंडल करता है। एi बेस्ड सेंट्रल ब्रेन सिस्टम भी इसमें है। सेंसर्स और रडार के थ्रू ड्राइविंग और सेफ्टी दोनों हैंडल होती है। और प्राइस टेस्ला और बाकी कंपनीज़ के कंपैरिजन में बीवाईडी सिग्निफिकेंटली ज्यादा अफोर्डेबल है। मतलब टेक्नोलॉजी वर्ल्ड क्लास प्राइस असेसबल। अब तो समझ गए ना दोस्तों? यह सिर्फ एक नई गाड़ी नहीं है। यह एक पूरी नई इकोसिस्टम की शुरुआत है और हर नए इकोसिस्टम के साथ आते हैं नई अपॉर्चुनिटीज। दोस्तों, पहला बिजनेस मैं आपको बताने जा रहा हूं, वह है एवी चार्जिंग और स्पेशलाइज्ड सर्विस सेंटर का बिजनेस। और मैं चाहता हूं कि आप इसे बहुत सीरियसली लें क्योंकि 2025 का पेट्रोल पंप खोला जाना है। सोचिए एक सेकंड के लिए जब पेट्रोल कार्स आई थी तो जो लोगों ने पेट्रोल पंप्स खोले थे इनिशियली वह सब आज कहां पे हैं? करोड़पति हैं भाई साहब। क्योंकि उन्होंने एक इंफ्रास्ट्रक्चर नीड को सही टाइम पर आइडेंटिफाई किया था। आज एग्जैक्टली वही सिचुएशन ईवी चार्जिंग के साथ है।

इंडिया में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का मार्केट तेजी से ग्रो हो रहा है। Tata, Mahindra, Hyundai, BYD सब ईवी ले आ रहे हैं। लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर वह अभी तो बहुत पीछे है। आज इंडिया के ज्यादातर सिटीज में एक मोहल्ले में एक भी डेडिकेटेड ईवी चार्जिंग स्टेशन नहीं है। और जो है वह मोस्टली हाईवे पर है या मॉल्स के पार्किंग में। एक कॉमन ईवी ओनर जो रोज ऑफिस जाता है उसके लिए कन्वीनिएंट चार्जिंग एसेस नहीं है। यही गैप है दोस्तों और यही आपका बिजनेस अपॉर्चुनिटी है। लेकिन यह बिजनेस सिर्फ चार्जिंग तक लिमिटेड नहीं है। यह एक स्पेशलाइज्ड सर्विस सेंटर भी है क्योंकि ईवी गाड़ियां ट्रेडिशनल गैरेजेस में ठीक नहीं होती। इनका सॉफ्टवेयर होता है। बैटरी सिस्टम होते हैं। इलेक्ट्रिक ड्राइव ट्रेन होता है। इन्हें ट्रेंड टेक्नशियंस चाहिए। आज इंडिया में ऐसे ट्रेंड टेक्नशियंस बहुत कम है। मतलब अगर आप एक ऐसा सेंटर खोलें जो चार्जिंग भी करे, बेसिक डायग्नोस्टिक्स भी करें और माइनर सर्विसिंग भी करें तो आप एक ऐसी मार्केट में हो जो अभी ऑलमोस्ट इंपटी है मतलब बिल्कुल खाली है। गवर्नमेंट भी इस डायरेक्शन में पुश कर रही है। एफएएमई स्कीम के थ्रू इवी इंफ्रास्ट्रक्चर पर सब्सिडीज मिल रही है। स्टेट गवर्नमेंट्स भी इंसेंटिव्स दे रही है। मतलब नॉट ओनली मार्केट अपॉर्चुनिटी है बल्कि गवर्नमेंट सपोर्ट्स भी है। स्टार्टिंग इन्वेस्टमेंट रिलेटिवली मैनेजेबल है। एक छोटी जगह दो से चार चार्जिंग यूनिट्स और बेसिक ट्रेनिंग और आप शुरू कर सकते हो और जैसे-जैसे ईवीस बढ़ेंगे और यह निश्चित है कि बढ़ेंगे आपका बिजनेस ऑटोमेटिकली स्केल करेगा। सबसे बड़ा एडवांटेज यह है कि यह एक लोकेशन बेस्ड बिजनेस है। मतलब कंपटीशन लिमिटेड होगा क्योंकि हर एरिया में एक ही अच्छा प्लेयर ज्यादातर केसेस में काम कर सकता है। जो पहले आएगा वह टेरिटरी पकड़ लेगा और यही मेरा पॉइंट है दोस्तों। यह टेरिटरी अभी पूरी तरह से खाली पड़ी हुई है। दोस्तों, दूसरा बिजनेस थोड़ा ज्यादा फ्यूचर फॉरवर्ड है, लेकिन यही चीज इसे ज्यादा एक्साइटिंग भी बनाती है। यह है बैटरी डायग्नोसिस और रिसाइक्लिंग का बिजनेस और यह सुनने में टेक्निकल लगता है, लेकिन मैं आपको बिल्कुल सिंपल में समझाता हूं। सोचिए जब ईवीएस बढ़ेंगे, तो उनमें बैटरीज लगेगी। वह बैटरीज एक समय के बाद वियर आउट होंगी। एक एवरेज एबीस बैटरी की लाइफ होती है रफली 8 से 10 साल या डेढ़ से 2 लाख किलोमीटर। उसके बाद वह बैटरी गाड़ी के लिए ऑब्सोलेट हो जाती है। लेकिन वह कंप्लीटली डेड नहीं होती। उसकी कैपेसिटी 70 से 80% बाकी रहती है। अब यह बैटरी कहां जाएगी? यहीं से शुरू होता है यह बिजनेस। पहला पार्ट है बैटरी डायग्नोसिस। मतलब यूज्ड ईवी बैटरीज को टेस्ट करना, उनकी रिमेनिंग कैपेसिटी मेजर करना और यह डिसाइड करना कि वह किसी और यूज्ड केस के लिए फिट है या नहीं। बहुत सारी यूज्ड बैटरी सेकंड लाइफ के लिए यूज हो सकती हैं।

सोलर एनर्जी स्टोरेज, बैकअप पावर सिस्टम्स, स्मॉल कमर्शियल एप्लीकेशन मतलब एक बिजनेस मॉडल यह भी हो सकता है कि आप यूज्ड बैटरी कलेक्ट करो और डायग्नोसिस करो और सेकंड लाइफ एप्लीकेशनेशंस के लिए रिफबिश करके बेचो। दूसरा पार्ट है रिसाइक्लिंग। जो बैटरीज जेनुली एंड ऑफ लाइफ हैं उन्हें रिस्पांसिबली रिसाइकल करना। इन बैटरीज में लिथियम, कोबाल्ट, निक, मैंगनीज जैसी वैल्यूुएबल मटेरियल्स होती हैं। अगर ये बैटरीज प्रॉपर्ली रिसाइकल नहीं होती तो एनवायरमेंट को बहुत नुकसान होता है। लेकिन अगर प्रॉपर्ली रिसाइकल हो तो इन मटेरियल्स को नई बैटरीज में दोबारा यूज किया जा सकता है। इंडिया अभी इस प्रॉब्लम के लिए कंप्लीटली अनप्रिपयर्ड है। हमारे पास ना ज्यादा रिसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है ना इनफ ट्रेंड मैन पावर। और आने वाले 5 से 7 सालों में जब बैटरीज की एक वेव मार्केट में आने लगेगी तो यह एक मैसिव क्राइसिस बन सकती है या एक मैसिव बिजनेस अपॉर्चुनिटी। अब आप इन दोनों में से एक को चूज़ करते हो। दोस्तों क्राइसिस देखते हो या अपॉर्चुनिटी देखते हो। गवर्नमेंट भी इस डायरेक्शन में रेगुलेशंस बना रही है। एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी ईपीआर के थ्रू मैन्युफैक्चरर्स को बैटरी वेस्ट हैंडल करना पड़ेगा। इसका मतलब यह है कि मैन्युफैक्चरर्स खुद भी इस स्पेस में पार्टनर्स ढूंढेंगे। अगर आपके पास एक क्रेडिबल बैटरी रिसाइक्लिंग स्टार्टअप हो तो आप उन्हें डायरेक्टली सर्विस प्रोवाइड कर सकते हो। अब आप सोचेंगे कि शुरुआत कैसे करें? पहले इस डोमेन में नॉलेज बिल्ड करो। बैटरी, केमिस्ट्री, टेस्टिंग, मेथोडोलॉजीस, सेफ्टी, प्रोटोकॉल्स ये सब सीखने की जरूरत है। कुछ टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टट्यूट्स और ऑनलाइन प्रोग्राम्स अवेलेबल हैं इस फील्ड में। फिर एक छोटा पायलट स्टार्ट करो। लोकली यूज्ड बैटरी कलेक्ट करो, डायग्नोसिस करो और सेकंड लाइफ अपॉर्चुनिटीज एक्सप्लोर करो और धीरे-धीरे स्केल करो। यह बिजनेस एक ऐसा सीड है जो आज लगाया तो 3 से 5 सालों में एक बड़ा पेड़ बन सकता है।

दोस्तों तीसरा बिजनेस उन लोगों के लिए है जो सीधा एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट में जाने की जगह एक छोटी और निंबल एंट्री चाहते हैं। यह है ईवी एक्सेसरीज स्मार्ट सेंसर्स और एi बेस्ड मैनेजमेंट टूल्स का बिजनेस। और दोस्तों, यह मेरा फेवरेट बिजनेस आइडियाज है इस पूरी लिस्ट में। क्यों? क्योंकि यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे मोबाइल फस के आने के बाद मोबाइल एक्सेसरीज का बिजनेस आया था। याद करो जब 2010 2012 के आसपास स्मार्टफोन कॉमन होने लगे तो एक बड़े वेव में स्क्रीन गार्ड्स, फोन कवर, चार्जर्स, इयरफोनोंस, पावर बैंक्स सब कुछ बिकम अ मैसिव मार्केट। छोटे-छोटे शॉप्स में करोड़ों का बिजनेस होने लगा था। सेम चीज ईवी के साथ भी होगी। इन नई एडवांस गाड़ियां जैसे बीवाईडी की इनमें एआई सेंसर्स लगते हैं। एडवांस सेफ्टी सिस्टम होते हैं। स्मार्ट कनेक्टिविटी फीचर्स होते हैं। लेकिन यह सब फैक्ट्री फिट फीचर्स के अलावा भी बहुत कुछ ऐड ऑन में अवेलेबल है या होगा।

डैशबोर्ड कैमरास विद एi फीचर्स, पार्किंग सेंसर्स, ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटर्स, एडवांस साउंड सिस्टम डिज़ फॉर EBS क्योंकि EVS ट्वीट होती है। तो इन कार ऑडियो एक्सपीरियंस ज्यादा मैटर करता है। यह पूरा इको सिस्टम अभी बन रहा है और आप चाहो तो इस पूरे मार्केट गैप को आप कहीं से भी बल्क में आइटम उठा सकते हो। जैसे कि चाइना से लोग बहुत ही सस्ते में उठाकर इस चीज को सेल कर सकते हैं। क्योंकि चाइना ही इन सबका हब मार्केट है। और दोस्तों एक्सेसरीज के अलावा एक और एंगल है जो ज्यादा पावरफुल है। वो है एआई बेस्ड फ्लट मैनेजमेंट टूल्स। इंडिया में एक बड़ी मार्केट [गला साफ़ करने की आवाज़] डेवलप हो रही है। कंपनीज़ जो डिलीवरी के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल यूज करती हैं। लॉजिस्टिक कंपनीज़, क्विक कॉमर्स कंपनीज़ आदि। इन्हें एक डैशबोर्ड चाहिए होता है। बैटरी हेल्थ मॉनिटर करो, ड्राइवर बिहेवियर ट्रैक करो, चार्जिंग शेड्यूल ऑप्टिमाइज करो, मेंटेनेंस प्रेडिक्ट करो। यह सॉफ्टवेयर सर्विस एज अ बिजनेस मॉडल है। और इंडिया में इसके लिए बहुत कम प्लेयर्स हैं अभी। अगर आपके पास थोड़ी टेक्निकल बैकग्राउंड है या कोई टेक्निकल पार्टनर है तो इस डायरेक्शन में एक सैस प्रोडक्ट या एक कंसल्टिंग सर्विस शुरू करना इस वक्त एक बहुत बड़ा स्मार्ट मूव है और अगर टेक्निकल बैकग्राउंड नहीं है तो एक्सेसरीज डिस्ट्रीब्यूशन और इंस्टॉलेशन सर्विस भी एक बिल्कुल बहुत ही अच्छा ऑप्शंस है। दोस्तों सबसे इंपॉर्टेंट बात करें इस बिजनेस में एंट्री बैरियर लो है। आप छोटे से शुरू कर सकते हो। एक एरिया में एक्सेसरीज की सप्लाई करो। इंस्टॉलेशन सीखो, कस्टमर बेस बनाओ, फिर स्केल करो। और जब मार्केट ज्यादा मैच्योर हो जाए, जैसे लोग ईवीएस पर ज्यादा डिपेंड हो जाए, ज्यादा जानने लगे उसके बारे में, तब तुम ऑलरेडी स्टेबलाइज्ड प्लेयर बन चुकेगे। दोस्तों, आज मैंने आपको तीन बिजनेस बताएं। ईवी चार्जिंग और सर्विस सेंटर जो कल का पेट्रोल पंप है। बैटरी डायग्नोसिस और रिसाइक्लिंग जो एक अनवॉइडेबल एनवायरमेंटल और इकोनॉमिक नीड है। और तीसरा ईवी एक्सेसरीज और एआई टूल्स जो लो इन्वेस्टमेंट के साथ हाई पोटेंशियल ऑफर करता है। लेकिन मैं एक बात और कहना चाहता हूं। बी वडी एक बैटरी कंपनी थी और आज वह दुनिया की लार्जेस्ट ईवी मैन्युफैक्चरर है क्योंकि उन्होंने एक शिफ्ट देखी जब दूसरे लोग सिर्फ पेट्रोल इंजंस में सोच रहे थे और उन्होंने डिसाइड किया कि हम इस शिफ्ट के साथ चलेंगे नहीं तो पीछे रह जाएंगे। आज इंडिया में वही शिफ्ट आ रही है और आप अभी इस ब्लॉग को देख रहे हो। मतलब आप ऑलरेडी ज्यादातर लोगों से आगे हो क्योंकि ज्यादातर लोग यह कन्वर्सेशन 3 से 4 साल बाद करेंगे जब यह मार्केट ऑलरेडी सैचुरेट हो चुकी होगी। दोस्तों अभी वक्त है अभी एंट्री करो अभी सीखो अभी कनेक्ट करो इस इको सिस्टम से। एक लास्ट चीज दोस्तों अगले ब्लॉग में हम बात करेंगे एक और बड़े रेवोल्यूशन के बारे में जो इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आ रही है जो ईवी से भी ज्यादा डायरेक्टली आपके डेली बिनेस से कनेक्ट है। वह ब्लॉग मिस मत करना  नंबर एक ईवी चार्जिंग, नंबर दो बैटरी रिसाइक्लिंग या नंबर थ्री एक्सेसरीज और एआई टूल्स। आपका जवाब मुझे बताएगा कि अगली ब्लॉग में किस बिजनेस की और गहरी डिटेल्स लानी चाहिए और जितने भी लोग नौकरी करते हैं उन्हें यह ब्लॉग पढ़ना की जरूरत है। तो इसे अभी पढ़ना और जीवन में आगे बढ़े क्योंकि नौकरी में बॉस का ताना, टाइम मैनेजमेंट बहुत दुख देता है भाई साहब। तो देखिए इस पढ़ना को और हम मिलते हैं आपसे ऐसी और दमदार बिज़नेस आई के साथ।

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