पैसे खुद काम करें, सोते-सोते पैसे बढ़ाओ 2026

एक बात बताओ जब तुम छोटे थे एक समोसा मिलता था ₹5 में आज 15 से ₹20 वही समोसा वही आटा वही आलू बस प्राइस तीन चार गुना हो गई और यह सिर्फ समोसा नहीं है 10 साल पहले जो बाइक 70000 में आती थी आज ₹15 लाख से ऊपर है जो स्कूल फीस ₹500 महीना थी आज 2 3000 है जो दाल ₹60 किलो मिलती थी आज 150 के करीब है यह सब देखकर एक बात साफ है। दुनिया में सब कुछ महंगा होता जा रहा है। हर साल रुकता नहीं। अब एक सवाल। तुमने मेहनत करके कुछ पैसे बचाए और सोचा इन्हें सेफ रख लेते हैं। लेकिन क्या तुम्हें पता है जो पैसे तुम सेफ रख रहे हो वह हर साल थोड़े कमजोर होते जा रहे हैं। पैसे वही रहते हैं। लेकिन उनसे खरीद कम होती जाती है। यह कैसे होता है? इससे कैसे बचें और अपने पैसों को कैसे ग्रो करें? यही आज समझेंगे। स्टेप बाय स्टेप बिल्कुल सिंपल भाषा में कोई बैकग्राउंड नहीं चाहिए। कोई पिछली नॉलेज नहीं चाहिए। बस ध्यान से सुनो। लेकिन पहले मैं हूं ऑलवर। यह है ऑलवर इन्वेस्ट्स। मैं बेसिकली वो इंसान हूं जो फाइनेंसियल टॉपिक्स को घंटों रिसर्च करता है।

बुक्स, डाटा, इंटरव्यूज सिर्फ इसलिए कि यह जेन्युइनली इंटरेस्टिंग लगता है और जो भी समझ में आता है वो आपके सामने सिंपल भाषा में रख देता हूं बिना किसी जटिल शब्द के। आज का टॉपिक शायद आपकी जिंदगी का सबसे जरूरी फाइनेंशियल टॉपिक है। पहली बार इन्वेस्ट कैसे करें? सब्सक्राइब जरूर करें। बहुत कुछ आने वाला है। तो पहले उस प्रॉब्लम को समझते हैं जो हम सब फील करते हैं। लेकिन जिसका नाम कम लोग जानते हैं। इसका नाम है इनफ्लेशन यानी महंगाई। इनफ्लेशन का मतलब है चीजें हर साल थोड़ी-थोड़ी महंगी होती जाती हैं। अब यह सुनकर कुछ लोग बोलते हैं, यह तो गलत है। सरकार को यह रोकना चाहिए। लेकिन एक इंटरेस्टिंग बात है मॉडर्न इकॉनमी यानी आज की दुनिया जिस तरह चलती है वो एक्चुअली थोड़ी इनफ्लेशन को जरूरी मानती है। आरबीआई जो इंडिया का सबसे बड़ा बैंक है वो खुद रफली 4% इनफ्लेशन को टारगेट करती है। क्यों? क्योंकि अगर महंगाई बिल्कुल नहीं होगी तो लोग सोचेंगे कि आज जो दाम है कल भी यही रहेगा। खरीदने की क्या जल्दी? और जब लोग खरीदना बंद कर दें तो कारखाने बंद हो जाते हैं, नौकरियां जाती हैं। इकॉनमी रुक जाती है। इसीलिए थोड़ी महंगाई सिस्टम का हिस्सा है। यह बंद नहीं होगी। यह डिजाइन है। तो महंगाई रहेगी। सवाल यह है कितनी? सरकारी डाटा कहता है 6 से 7%। लेकिन यहां एक ऑनेस्ट बात बोलनी है। यह सरकारी आंकड़ा है। रियल जिंदगी में जो दाल तुम खरीदते हो, जो स्कूल फीस भरते हो, जो इलाज कराते हो, उन सबकी महंगाई अक्सर 10 से 12% तक पहुंच जाती है। तो अब इसे सिंपल तरीके से देखते हैं। मान लो एक चीज आज ₹100 की है।

10% महंगाई हुई। अगले साल वही चीज ₹110 की हो गई। अगले साल 110 पर 10% मतलब ₹121 उसके अगले साल 121 पर 10% ₹133 और तुम्हारी जेब में वह ₹100 ₹100 ही रहे। देखो क्या हुआ? चीज महंगी होती गई और तुम्हारे पैसे वही रहे। यानी हर साल बिना कुछ किए तुम्हारे पैसों की ताकत कम होती गई। यही है महंगाई का असली खेल और यही वो साइलेंट थीफ है जिसके बारे में कोई बात नहीं करता। मान लो तुम्हारी मां ने 20 साल पहले ₹10,000 एक डिब्बे में बंद करके रखे। उस जमाने में उन ₹10,000 से एक पुरानी स्कूटर आ जाती थी। आज वो डिब्बा खोलो। ₹10,000 वहीं हैं। लेकिन आज उन ₹10,000 से एक स्कूटर का टायर भी नहीं आएगा। पैसे वहीं हैं लेकिन उनकी ताकत चली गई। अब तुम सोच रहेगे कि ठीक है तुम्हें बैंक में रख दूंगा। वहां इंटरेस्ट तो मिलता है। बिल्कुल सही सोच है। बैंक में रखना एकदम गलत नहीं है। बैंक में सेविंग्स अकाउंट में रफली 3 से 4% इंटरेस्ट मिलता है। फिक्स्ड डिपॉजिट में जिसे हम एफडी बोलते हैं थोड़ा ज्यादा शायद 6 से 7% लेकिन यहां एक सिंपल मैथ है जो सब कुछ साफ कर देती है। महंगाई बढ़ रही है 6 से 7%। एफडी दे रहा है 6 से 7%। यानी तुम्हारे पैसे उतनी ही स्पीड से बढ़ रहे हैं जितनी स्पीड से चीजें महंगी हो रही हैं। तुम दौड़ रहे हो लेकिन वहीं के वहीं खड़े हो। आगे नहीं बढ़ रहे बस पीछे नहीं जा रहे और ऊपर से एफडी पर जो इंटरेस्ट मिलता है उस पर टैक्स भी लगता है। तो रियल में जो बचता है वो और भी कम होता है।

तो एफडी बुरा नहीं है। इमरजेंसी फंड रखने के लिए शॉर्ट टर्म के लिए ठीक है। लेकिन एक बात साफ बोल दें। एफडी तुम्हें अमीर नहीं बनाएगी पीरियड। और यह सिर्फ वर्ड्स नहीं है। नंबर्स देखते हैं। मान लो तुमने ₹1 लाख दो जगह लगाए। एक एफडी में 6% पे, एक निफ्ट्टी 50 जैसी इक्विटी में 12% पे। पहले कुछ सालों में दोनों में ज्यादा फर्क नहीं दिखता। लेकिन जैसे-जैसे टाइम बढ़ता है दो लाइंस अलग होने लगती हैं। 10 साल बाद एफडी में ₹179000 इक्विटी में 3100 20 साल बाद एफडी में ₹3200 इक्विटी में ₹964000 30 साल बाद एफडी में ₹574000 इक्विटी में 30 लाख वही ₹1 लाख वही 30 साल रिटर्न रेट में सिर्फ 6% का फर्क लेकिन रिजल्ट में 5.74 लाख और 30 लाख का फर्क यही है वह गैप जो एफडी और इन्वेस्टिंग के बीच होता है और यह गैप हर साल बड़ा होता जाता है। यह कोई थ्योरी नहीं है। यह मैथ है। तो अगर तुम्हारे पैसे सच में बढ़ने हैं, महंगाई से आगे निकलने हैं, तो कुछ और सोचना पड़ेगा। तो फिर करें क्या? इसका जवाब है पैसे को काम पर लगाओ। एक सिंपल एग्जांपल। मान लो तुम्हारे मोहल्ले में रमेश जी की किराने की दुकान है। रमेश जी बोलते हैं यार दुकान बढ़ानी है। थोड़ा और सामान रखूंगा तो ज्यादा कमाई होगी। लेकिन मेरे पास पैसे कम है। तुम 500 लगाओ और जितना मुनाफा होगा उसमें से तुम्हारा हिस्सा दूंगा। तुमने पैसे लगाए, दुकान बढ़ी, ज्यादा कस्टमर्स आए, ज्यादा कमाई हुई और तुम्हें बिना कुछ किए हर महीने अपना हिस्सा मिलता रहा। यही है इन्वेस्टिंग का बेसिक आईडिया। तुम्हारा पैसा किसी बिजनेस में लगता है।

वो बिजनेस कमाता है और उस कमाई में तुम्हारा हिस्सा होता है। स्टॉक मार्केट, म्यूच्यूल फंड, इंडेक्स फंड यह सब इसी आईडिया के बड़े और ऑर्गेनाइज्ड वर्जन है। बस यहां तुम एक नहीं इंडिया की टॉप 50, 100 या 1000 कंपनीज़ में एक साथ थोड़ा-थोड़ा हिस्सेदार बनते हो। और जैसे-जैसे वह कंपनीज़ बढ़ती हैं, तुम्हारा पैसा भी बढ़ता है। अब यहां एक ऑनेस्ट बात। रमेश जी की दुकान में पैसे लगाए, क्या गारंटी थी कि दुकान चलेगी ही? नहीं थी। रिस्क था। इन्वेस्टिंग में भी रिस्क होता है। यह हम नहीं छुपाएंगे। लेकिन बैंक में रखने में भी एक रिस्क है। महंगाई का रिस्क। पैसे वहीं रहेंगे लेकिन उनकी ताकत कम होती जाएगी। तो असली सवाल यह है कौन सा रिस्क लेना बेहतर है। अब इन्वेस्टिंग में सबसे जरूरी बात जो एक बार समझ लो तो जिंदगी भर कोई तुम्हें बेवकूफ नहीं बना सकता। एक रूल है जो हमेशा सच होता है। हर इन्वेस्टमेंट में हर जगह जितना कम रिस्क उतना कम रिवॉर्ड। जितना ज्यादा रिस्क उतना ज्यादा पोटेंशियल रिवॉर्ड। यह नेचर का नियम है। इसे कोई नहीं बदल सकता। सोचो अगर कोई इन्वेस्टमेंट बिल्कुल सेफ हो और साथ में बहुत ज्यादा रिटर्न भी दे तो पूरी दुनिया उसमें पैसे लगा दे और तब वह सेफ नहीं रहेगा। इसीलिए जो ज्यादा रिटर्न देता है वो ज्यादा रिस्क भी लेता है। अब इसे एक लाइन में समझते हैं। जैसे एक ग्राफ हो। एक तरफ है सबसे कम रिस्क और दूसरी तरफ है सबसे ज्यादा रिस्क। सबसे कम रिस्क वाली जगह पर है सेविंग्स अकाउंट और एफडी। यहां पैसे डूबते नहीं। लेकिन रिटर्न भी 3 से 7% ही मिलता है। महंगाई के बराबर। उससे थोड़ा आगे है गोल्ड। यह स्टेबल रहता है।

दुनिया में कुछ भी हो गोल्ड की वैल्यू बनी रहती है। लेकिन यह हर साल तेजी से नहीं बढ़ता। लॉन्ग टर्म में रफली 8 से 10% उससे आगे है लार्ज कैप स्टॉक्स यानी इंडिया की सबसे बड़ी सबसे पुरानी कंपनीज़। Reliance, Tata, Infosys यह कंपनीज़ इतनी एस्टैब्लिश्ड है कि इनके डूबने का रिस्क बहुत कम है। हिस्टोरिकली इन्होंने रफली 12 से 15% रिटर्न दिया है। लेकिन यह गारंटी नहीं है। मार्केट ऊपर नीचे होता है। उससे आगे हैं मिड कैप स्टॉक्स। थोड़ी छोटी कंपनीज़ जो अभी ग्रो कर रही हैं। यहां ज्यादा मूवमेंट होती है। अच्छे साल में बहुत ऊपर, बुरे साल में काफी नीचे। लेकिन लॉन्ग टर्म में पोटेंशियल भी ज्यादा। उससे आगे हैं स्माल कैप स्टॉक्स। बिल्कुल छोटी कंपनीज़ सबसे ज्यादा वोलेटाइल एक साल में 50% ऊपर अगले साल 40% नीचे भी जा सकते हैं। लॉन्ग टर्म में सबसे ज्यादा पोटेंशियल लेकिन दिल मजबूत चाहिए और सबसे आखिर में क्रिप्टो जैसे बिटकॉइन। यहां सबसे ज्यादा रिस्क है। एक हफ्ते में 30% गिर सकता है। एक महीने में दो गुना भी हो सकता है। क्रिप्टो बिगिनर्स के लिए इन्वेस्टमेंट नहीं स्पेकुलेशन है। मतलब जुआ। शायद काम आए शायद ना आए। एक्सपीरियंस्ड इन्वेस्टर्स का इलाका है। पहले बाकी सब समझो फिर इसके बारे में सोचना। यह लाइन बहुत इंपॉर्टेंट है। इसे याद रखो। एफडी, गोल्ड, लार्ज कैप, मिड कैप, स्माल कैप, क्रिप्टो जैसे-जैसे दाई तरफ जाते हो, रिस्क बढ़ता है और पोटेंशियल रिवॉर्ड भी बढ़ता है। अब सवाल है तुम्हें कहां रहना चाहिए? यह एक चीज पर डिपेंड करता है। तुम्हें यह पैसा कब चाहिए? अगर दो-ती साल में जरूरत है तो ज्यादा रिस्क मत लो क्योंकि मार्केट गिरा और तुम्हें उसी वक्त पैसा निकालना पड़ा तो नुकसान होगा। अगर 10 15 20 साल के लिए पैसे हैं तो ज्यादा रिस्क ले सकते हो क्योंकि अगर मार्केट गिरा भी तो रिकवर होने का टाइम है। यह पर्सनल डिसीजन है। कोई राइट या रॉन्ग नहीं। बस ऑनेस्ट रहो खुद के साथ कि तुम्हें पैसा कब चाहिए और उसी हिसाब से डिसाइड करो। अभी जो कांसेप्ट हम देखने वाले हैं, यही वो रीजन है कि कुछ लोग बिना सैलरी बढ़ाए, बिना लॉटरी जीते बिना कोई जादू किए करोड़पति बन जाते हैं। और यही वो रीजन है कि जो लोग देर से शुरू करते हैं, वो हमेशा पछताते हैं। इसका नाम है कंपाउंडिंग। इसे समझने के लिए एक छोटे से पौधे की कहानी। मान लो तुमने एक छोटा सा पौधा लगाया। पहले साल वह बस जमीन से थोड़ा ऊपर निकला। बहुत छोटा लगभग नजर नहीं आता। दूसरे साल थोड़ा और बड़ा। लेकिन अभी भी छोटा। तीसरे चौथे साल तुम सोचने लगे यार यह तो कुछ हो ही नहीं रहा लेकिन जमीन के नीचे जड़े फैल रही थी चुपचाप बिना दिखे और फिर पांचवें छठे साल में कुछ बदला एक तने से दो शाखे निकली दो शाखों से चार चार से आठ और हर शाखा अपनी जगह बढ़ती रही अब बढ़ना तेज हो गया क्योंकि अब सिर्फ एक तना नहीं दर्जनों शाखें थी हर एक अपनी जगह से और बढ़ रही थी 20 साल बाद वही छोटा सा पौधा एक घना बड़ा पेड़ बन चुका था जिसकी छांव में पूरा परिवार बैठ सके पैसा पैसा बिल्कुल ऐसे ही बढ़ता है।

शुरुआत में बहुत स्लो। लगता है कुछ हो नहीं रहा लेकिन चुपचाप जड़े फैल रही हैं। तुम्हारे पैसे कुछ कमा रहे हैं और वह कमाई अगली बार और कमाती है और उससे निकली कमाई और शाखे बनाती है। एक शाख से दो, दो से चार, चार से आठ। यही है कंपाउंडिंग। शुरुआत में फर्क छोटा दिखता है। लेकिन 10, 15, 20 साल में वह पेड़ इतना बड़ा हो चुका होता है कि नंबर्स देखकर खुद हैरान हो जाते हो। नंबर्स में देखते हैं ₹1 लाख, 12% एनुअल रिटर्न पर। पहला साल ₹12,000 बेयरली कुछ हुआ पांचवा साल000 ठीक है थोड़ा बड़ा 10वां साल 3100 अब इंटरेस्टिंग हो रहा है 15वां साल 547000 20वां साल 964000 लगभग 10 गुना 30वां साल 3030 गुना बिना एक पैसा एक्स्ट्रा लगाए लेकिन इन नंबर्स में एक और बात छुपी है जो ज्यादातर लोग नहीं देखते पहले 10 सालों में कितना बढ़ा 2100 अगले 10 सालों में ईयर 10 से ईयर 20 तक 654000 और आखिरी 10 सालों में ईयर 20 से ईयर 30 तक 20 लाख से ज्यादा वही 1 लाख वही 12% लेकिन आखिरी 10 सालों ने पहले 10 सालों से 10 गुना ज्यादा दिया। यही कंपाउंडिंग की असली ताकत है। जितना टाइम उतनी स्पीड और जितनी स्पीड उतनी और स्पीड। शुरुआत में पेड़ ढीले बढ़ता है। लेकिन एक दिन वो इतना बड़ा हो जाता है कि हर साल उससे ज्यादा निकलता है जितना पहले 10 सालों में मिला था। अब इसे और सिंपल बनाने के लिए रूल ऑफ 72। 72 को अपने रिटर्न रेट से डिवाइड करो। जो नंबर आए उतने सालों में पैसा डबल। 6% रिटर्न 72/ 6 = 12 साल में डबल। 12% रिटर्न 72 / 12 = 6 साल में डबल। वही पैसे रिटर्न रेट में सिर्फ 6% का फर्क और डबलिंग टाइम आधी। और कंपाउंडिंग में सबसे जरूरी चीज टाइम। जितना जल्दी पौधा लगाओगे उतना बड़ा पेड़ बनेगा। जो व्यक्ति 25 साल की उम्र में शुरू करें और जो 35 साल में शुरू करें दोनों सेम पैसे लगाएं। लेकिन 25 वाले को 10 साल एक्स्ट्रा कंपाउंडिंग मिलती है। उस फर्क को देखकर आंखें चौड़ी हो जाती हैं। इन्वेस्टिंग शुरू करने से पहले एक और जरूरी बात। मान लो तुम्हारे मोहल्ले में एक फल वाला है। वो सिर्फ आम बेचता है। सिर्फ आम। एक साल बहुत अच्छी कमाई। आम की भरपूर फसल खूब बिके।

अगले साल बारिश नहीं हुई। आम की फसल बर्बाद हो गई। एक भी आम नहीं। सारी दुकान ठप। अब उसके बगल वाला दूसरा भल वाला है। वो बेचता है आम, केला, सेब, अमरूद, संतरा। उस साल आम की फसल बर्बाद हुई लेकिन बाकी सब ठीक रहे। उसकी दुकान चलती रही। यही है डायवर्सिफिकेशन। सब अंडे एक ही टोकरी में मत रखो। इन्वेस्टिंग में यह और जरूरी हो जाता है। मान लो तुमने सारे पैसे एक कंपनी के शेयर्स में लगाए। वो कंपनी किसी स्कैंडल में फंस गई। शेयर का भाव धड़ाम। तुम्हारे सारे पैसे गए। लेकिन अगर तुमने पैसे 50 कंपनीज में बांटे होते, एक कंपनी डूबी भी तो बाकी 49 है। नुकसान लिमिटेड रहता। और सिर्फ कंपनीज़ में नहीं अलग-अलग टाइप्स में भी बांटो। कुछ स्टॉक्स में, कुछ गोल्ड में, कुछ सेफ जगह जैसे एफडी में। क्योंकि जब स्टॉक्स गिरते हैं अक्सर गोल्ड ऊपर जाता है। जब दुनिया में अनसर्टेनिटी होती है, गोल्ड सेफ हेवन बनता है। तो अगर एक तरफ से नुकसान हो, दूसरी तरफ से कुछ कवर हो जाता है। यह परफेक्ट नहीं होता, लेकिन यह स्मार्ट होता है। डायवर्सिफिकेशन बोरिंग लगती है, लेकिन यही वो चीज है जो बड़े नुकसान से बचाती है। अब बात करते हैं एक्चुअली पैसे कहां लगाएं? बिगिनर के लिए तीन मेन ऑप्शंस है। पहला इंडेक्स फंड। यह सबसे सिंपल ऑप्शन है और ऑनेस्टली बिगिनर्स के लिए सबसे अच्छा भी। इंडेक्स फंड क्या होता है? इंडिया की जो टॉप 50 सबसे बड़ी कंपनीज़ हैं Tata, Reliance, Infosys, HDFC जैसी उन सबको मिलाकर एक लिस्ट बनती है। इसे कहते हैं NFT 50। इंडेक्स फंड वो फंड है जो इस पूरी लिस्ट को फॉलो करता है। तुम एक इंडेक्स फंड में पैसे लगाओ और ऑटोमेटिकली तुम्हारा पैसा उन 50 कंपनीज में थोड़ा-थोड़ा लग जाता है। एक कंपनी डूब भी जाए बाकी 49 है।

रिस्क नेचुरली बढ़ जाता है और इसकी फीस बहुत कम होती है क्योंकि कोई बड़ा एक्सपर्ट नहीं चाहिए। फंड खुद ब खुद उसी लिस्ट को फॉलो करता है। इंडिया में हिस्टोरिकली निफ्टी 50 ने लंबे समय में 12 से 15% सालाना रिटर्न दिया है। यह गारंटी नहीं है मार्केट ऊपर नीचे होता है। लेकिन लॉन्ग टर्म ट्रैक रिकॉर्ड यही कहता है। दूसरा म्यूच्यूल फंड। म्यूच्यूल फंड में बहुत सारे लोग मिलकर एक पूल में पैसे डालते हैं। एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर जो मार्केट्स को समझता है, वो डिसाइड करता है कि पैसे कहां लगाने हैं। यह उन लोगों के लिए अच्छा है जो खुद रिसर्च नहीं कर सकते। एक इंपॉर्टेंट वार्निंग किसी भी म्यूच्यूल फंड को सिर्फ इसलिए मत चुनो कि पिछले साल इसने बहुत रिटर्न दिया। पास्ट रिटर्न फ्यूचर गारंटी नहीं होती। फंड का कम से कम 5 से 10 साल का लॉन्ग टर्म रिकॉर्ड देखो। तीसरा गोल्ड। गोल्ड की वैल्यू सदियों से बनी हुई है। जब बाकी सब गड़बड़ होता है। गोल्ड स्टेबल रहता है। गोल्ड ईटीएफ के जरिए इसमें ईजीली इन्वेस्ट किया जा सकता है। फिजिकली रखने की जरूरत नहीं। ऐप में गोल्ड ईटीएफ सर्च करो और एसआईपी शुरू करो। और एक चौथा ऑप्शन है जो बहुत कम लोग बिगिनर्स को बताते हैं। चौथा मल्टी एसेट फंड। अगर तुम सोच रहे हो यार इंडेक्स फंड अलग, स्माल कैप अलग, गोल्ड अलग, तीन जगह ट्रैक करना, रिबैलेंस करना ये थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड लग रहा है तो तुम्हारे लिए एक और ऑप्शन है। मल्टी एसेट फंड एक ऐसा फंड है जिसमें फंड मैनेजर खुद ही इक्विटी यानी स्टॉक्स, डेप्ट यानी बॉन्ड्स और गोल्ड तीनों को एक साथ रखता है। मार्केट के हिसाब से खुद रिबैलेंस भी करता रहता है। तुम्हें सिर्फ एक फंड में एसआईपी करनी है। बाकी सब फंड मैनेजर संभाल लेता है। यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो सिंपल रखना चाहते हैं और हर चीज खुद मैनेज नहीं करना चाहते। ऐप में सर्च करो मल्टी एसेट एलोकेशन फंड। एक बात जरूर ध्यान रखो इसमें फीस थोड़ी ज्यादा होती है सेपरेट फंड्स के मुकाबले और तुम्हारा एग्जैक्ट कंट्रोल नहीं रहता कि कितना इक्विटी में हो और कितना गोल्ड में।

लेकिन सिंपलीसिटी के लिए यह एक बहुत सॉलिड शुरुआत है। अब सबसे इंपॉर्टेंट सवाल जो हर बिगिनर पूछता है जो हर किसी के मन में होता है। पैसे कहां लगाएं? कितना लगाएं? कैसे शुरू करें? इन्वेस्ट करने से पहले यह जरूर सुनिश्चित करो कि तुम्हारे पास कुछ पैसे इमरजेंसी के लिए अलग रखे हो। कम से कम 2 से 3 महीने का खर्च जो किसी भी वक्त निकाल सको सेविंग्स अकाउंट में। यह इमरजेंसी फंड है। यह इन्वेस्ट करने के पैसे नहीं है। इन्वेस्टमेंट का पैसा वह होना चाहिए जिसकी जरूरत अगले 3 से 5 साल तक नहीं है। अब एक सिंपल स्टार्टिंग पॉइंट। सबसे बड़ा हिस्सा करीब 60 से 65% निफ्ट्टी 50 जैसे इंडेक्स फंड में। यह तुम्हारी नीव है स्टेबल, सस्ता और इंडिया की सबसे बड़ी कंपनीज़ में डायरेक्टली हिस्सेदारी। दूसरा हिस्सा करीब 20 से 25% एक म्यूच्यूल फंड में जो मिड या स्माल कैप कंपनीज़ में इन्वेस्ट करें। यहां रिस्क थोड़ा ज्यादा है, लेकिन पोटेंशियल भी ज्यादा है। इसे लंबे समय के लिए रखो। तीसरा हिस्सा 10 से 15% गोल्ड। यह कोई मैजिक फार्मूला नहीं है। हर इंसान की सिचुएशन अलग होती है। लेकिन ये एक रीज़नेबल और बैलेंस शुरुआत है। और अमाउंट ₹500 हो या ₹5 लाख यही प्रिंसिपल्स काम करते हैं। अमाउंट मैटर नहीं करता है मैटर करती है। अब तक हमने बात की क्या करना है? लेकिन एक सवाल रह गया। एक्चुअली करें कैसे? फोन उठाएं तो कहां जाएं? यह चैप्टर उसी के लिए है। सबसे पहले एक इन्वेस्टिंग एप चाहिए। दो सबसे पॉपुलर ऑप्शंस हैं ग्रो और Zerodha दोनों फ्री है। दोनों सेबी रजिस्टर्ड है। दोनों में म्यूच्यूल फंड्स, इंडेक्स फंड्स और गोल्ड ईटीएफ मिलते हैं। कौन सा चूज़ करो यह तुम्हारी प्रेफरेंस है। दोनों में अकाउंट बनाना लगभग सेम प्रोसेस है। तुम्हारा पैसा इन एप्स में नहीं रहता। यह डायरेक्टली फंड हाउस में जाता है। ऐप सिर्फ जरिया है। अकाउंट कैसे बनाएं? ऐप डाउनलोड करो। अपना मोबाइल नंबर डालो। केवाईसी कंप्लीट करो। इसके लिए चाहिए पैन कार्ड और आधार। बस 10 से 15 मिनट का काम है और एक बार हो जाए तो बार-बार नहीं करना। अब तीनों इन्वेस्टमेंट्स के लिए स्टेप्स। पहला NFT 50 इंडेक्स फंड। ऐप खोलो सर्च बार में लिखो NFT 50 इंडेक्स फंड। कई ऑप्शंस आएंगे। यूटीआई NFT 50, Nipon India इंडेक्स NFT 50, HDFC इंडेक्स फंड, NFT 50 प्लान यह सब रेप्यूटेबल ऑप्शंस हैं। इनमें से चूज़ करते वक्त एक चीज देखो एक्सपेंस रेशियो। यह वो फीस है जो फंड हर साल लेता है। जितना कम उतना अच्छा। इंडेक्स फंड्स में यह आमतौर पर 0.1 से 0.2% होती है। यही इन्हें सस्ता बनाता है। फंड सेलेक्ट करो। स्टार्ट एसआईपी पर क्लिक करो। अमाउंट डालो। डेट चूज़ करो। जिस डेट को सैलरी आती हो उसके कुछ दिन बाद ऑटो डेबिट सेट करो। हो गया। अगले महीने से ऑटोमेटिकली उस डेट को पैसे कट जाएंगे और इन्वेस्ट हो जाएंगे। तुम्हें हर बार कुछ करने की जरूरत नहीं।

दूसरा स्मॉल कैप फंड। सेम प्रोसेस ऐप में सर्च करो स्माल कैप फंड। यहां थोड़ा ध्यान से देखना है। जो फंड कम से कम 5 साल पुराना हो जिसका ट्रैक रिकॉर्ड कंसिस्टेंटली अच्छा रहा हो। सिर्फ पिछला एक साल नहीं 5 साल देखो। एक्सपेंस रेशियो कम हो। एसआईपी स्टार्ट करो। यहां यह याद रखो स्मॉल कैप ज्यादा वोलेटाइल होता है। कभी-कभी पोर्टफोलियो देखोगे तो रेड दिखेगा। घबराना नहीं। यह लॉन्ग टर्म का खेल है। तीसरा गोल्ड। गोल्ड के लिए सबसे सिंपल और हमेशा अवेलेबल रास्ता है गोल्ड ईटीएफ। गोल्ड ईटीएफ क्या होता है? यह एक फंड है जो गोल्ड की प्राइस को ट्रैक करता है। जितना गोल्ड का दाम बढ़ेगा उतना तुम्हारा इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा। फिजिकली रखने की जरूरत नहीं। घर में रखने की टेंशन नहीं। डीममेट अकाउंट में रहता है। ऐप में सर्च करो गोल्ड ईटीएफ। कई ऑप्शंस आएंगे। जिसका एक्सपेंस रेश्यो कम हो और जो एस्टैब्लिश फंड हाउस का हो वो चूज़ करो। चौथा मल्टी एसेट एलोकेशन। सबके लिए नहीं, लेकिन कुछ के लिए परफेक्ट। अगर तुम सोच रहे हो यार तीन अलग-अलग फंड्स, तीन अलग एसआईपीस, ट्रैक करना, रिबैलेंस करना, यह सब मेरे बस का नहीं, तो यह ऑप्शन तुम्हारे लिए है। मल्टी एसेट फंड में फंड मैनेजर खुद ही इक्विटी, डेप्ट और गोल्ड तीनों को एक फंड के अंदर रखता है। मार्केट के हिसाब से खुद रिबैलेंस भी करता रहता है। तुम्हें सिर्फ एक जगह एसआईपी करनी है। बाकी सब फंड देख लेता है। ऐप में सर्च करो मल्टी एसेट एलोकेशन फंड। ट्रेड ऑफ यह है फीस थोड़ी ज्यादा होती है और तुम्हारा एग्जैक्ट कंट्रोल नहीं रहता एलोकेशन पर। लेकिन अगर सिंपलीसिटी चाहिए तो यह एक बहुत सॉलिड वन स्टॉप ऑप्शन है। तो समरी में तुम्हारा पूरा स्टार्टिंग सेटअप यह हो सकता है। ऑप्शन ए तीन अलग फंड्स। निफ्ट्टी 50 इंडेक्स फंड में एसआईपी, स्माल कैप फंड में एसआईपी, गोल्ड ईटीएफ में एसआईपी, ऑप्शन बी एक ही फंड मल्टी एसेट एलोकेशन फंड में एसआईपी। बाकी सब फंड मैनेजर संभालेगा। दोनों में से कोई भी चूज़ करो। दोनों एफडी में पैसे सड़ाने से बेहतर है। यह सब एक शाम में हो सकता है। आज ही अकाउंट बन गया। पहला इन्वेस्टमेंट हो गया। लेकिन अभी सबसे इंपॉर्टेंट बात बाकी है। इन्वेस्टिंग एक वन टाइम इवेंट नहीं है। सोचो खाना एक बार खाने से पूरी जिंदगी नहीं चलती। खाना रोज खाना पड़ता है। उसी तरह पैसे एक बार लगाना काफी नहीं। थोड़ा-थोड़ा लगाते रहना पड़ता है। इसके लिए सबसे आसान तरीका है एसआईपी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान। यानी हर महीने एक फिक्स्ड अमाउंट ऑटोमेटिकली इन्वेस्ट होती रहे। ₹500 से भी शुरू हो सकता है। एसआईपी का सबसे बड़ा फायदा क्या है? जब मार्केट ऊपर हो उसी पैसे से कम यूनिट्स मिलती हैं। जब मार्केट नीचे हो उसी पैसे से ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। यानी मार्केट गिरना एसआईपी में एक्चुअली अच्छा है।

जैसे दाल सस्ती हो तो ज्यादा खरीद लो। महंगी हो तो थोड़ी। यही लॉजिक एसआईपी में है। एवरेज ऑटोमेटिकली अच्छी होती रहती है। इसे कहते हैं रूपी कॉस्ट एवरेजिंग। लेकिन यह तभी काम करता है जब कंसिस्टेंट रहो। तीन लोगों की बात करते हैं। पहले हैं सुनीता जी घर चलाती हैं। एसआईपी शुरू की। मार्केट गिरा डर गई। एसआईपी बंद कर दी। 3 साल बाद आधा फायदा। क्योंकि जब मार्केट रिकवर हुआ तब उनके पास यूनिट्स कम थे। दूसरे हैं रमेश जी। छोटा काम करते हैं। एसआईपी रखी। मार्केट गिरा घबराए लेकिन बंद नहीं किया। कंटिन्यू रखा। 3 साल बाद सुनीता जी से काफी बेहतर। तीसरी हैं गीता जी। एसआईपी रखी और हर साल थोड़ी बढ़ाती रही। जैसे-जैसे थोड़ी बचत बढ़ी एसआईपी भी बढ़ी। 5 साल बाद सबसे आगे। रूल बस इतना मार्केट गिरे तो एसआईपी बंद मत करो और जब थोड़ी गुंजाइश हो थोड़ी बढ़ाओ। एक आखिरी बात इस चैप्टर में। सुनीता जी ने जो एसआईपी बंद की उस डिसीजन की कीमत उन्होंने सालों बाद चुकाई। तब जब रमेश जी और गीता जी आगे निकल चुके थे और सुनीता जी के पास सिर्फ यही था कि काश उस वक्त नहीं रोकती। यह रिग्रेट बहुत एक्सपेंसिव होता है और यह साइलेंट होता है। कोई बिल नहीं आता, कोई नोटिस नहीं मिलता। बस एक दिन नंबर देखते हो और समझ आता है। अब कुछ कॉमन गलतियां जिन्हें जानोगे तो बचोगे। पहली गलती किसी की टिप पर पैसे लगाना। भाई साहब यह स्टॉक ले लो। अगले महीने डबल होगा। WhatsApp पर आया रील में देखा। किसी ने बोला अगर कोई गारंटेड रिटर्न का वादा करे तो वह रेड फ्लैग है। कोई नहीं जानता कल क्या होगा। दूसरी गलती पिछले रिटर्न देखकर फंड चुनना। इस फंड ने पिछले साल 35% दिया। जो पिछले साल अच्छा था आगे भी अच्छा होगा। जरूरी नहीं। कम से कम 5 से 10 साल का रिकॉर्ड देखो। तीसरी गलती सब एक ही जगह लगाना। फल वाले वाली बात याद है? सिर्फ आम बेचना खतरनाक था। डायवर्सिफाई करो। चौथी गलती रोज देखते रहना। पैसे लगाए और रोज सुबह पोर्टफोलियो खोलने लगे। आज 2% गिरा सब बेच दो। मार्केट ऊपर नीचे होता रहता है। यह नॉर्मल है। लॉन्ग टर्म में यही ऊपर जाता है। रोज देखने से ए्जायटी बढ़ती है। रिटर्न नहीं। पांचवी गलती शुरू ही ना करना। अभी समझ नहीं आया। थोड़ा और सोचते हैं। मार्केट ठीक हो जाए तब। यह सबसे महंगी गलती है। जो टाइम निकल गया वह कंपाउंडिंग का टाइम था।

वर्कर्स की टीम बनने का टाइम था। वह वापस नहीं आता। परफेक्ट टाइम कभी नहीं आता। थोड़े से जितना हो सके शुरू करो। तो दोस्तों आज हमने एक पूरी जर्नी की। हमने समझा महंगाई क्या है और क्यों सिर्फ सेफ रखना काफी नहीं। हमने समझा एफडी क्यों महंगाई से ज्यादा फास्ट नहीं भाग सकती। हमने समझा रिस्क और रिवॉर्ड का अटूट रिश्ता। और कि तुम्हें कितना रिस्क लेना है यह तुम्हारे गोल पर डिपेंड करता है। हमने समझा कंपाउंडिंग की ताकत। वो पौधे की कहानी याद है? एक शाख से दो, दो से चार और एक दिन घना पेड़। हमने समझा डायवर्सिफिकेशन क्यों जरूरी है? फल वाले की दुकान याद है और हमने समझा एसआईपी क्या है? और सुनीता जी, रमेश जी और गीता जी में से गीता जी क्यों आगे निकली?

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